साबुत आमलेट पराँठा देख कर मैं हैरान रह गया

कभी कभी ऐसी चीजें देखने में आती हैं जो होती बेहद आसान हैं लेकिन उसे देखते ही भौंचक्का रह जाता है मानव। मेरे साथ भी कई बार ऐसा होता है तब मैं इस उधेड़-बुन में लग जाता हूँ कि आखिर यह है क्या और कैसे बना होगा।

यहाँ किसी रॉकेट की बात नहीं है और ना ही किसी पिरामिड की लेकिन मैं चकित हुए बिना रह नहीं सका था।

30 वर्ष पहले 1981 के फरवरी माह की एक सुबह जब मैंने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से उतर लुधियाना स्टेशन के बाहर कदम रखा तो कडकडाती ठण्ड के साथ घुप्प अँधेरे ने मेरा स्वागत किया। गाँव जाने वाली बसें 7 बजे के पहले नहीं चलती थीं और अभी तो 5 ही बजे थे। अपना बैग उठाए धीमे धीमे मैं बाहर हो रहा था। घंटाघर की और वाले गेट के बाहर ही अलाव की आंच तापते लोग चाय के गिलास थामे अपने आस-पास वालों से बतियाते दिखे। मैंने भी कुछ देर वहां ठिठक कर ठण्ड से बचने का जुगाड़ किया।

अंधेरा छटने से पहले ही मुझे भूख लग आई। ट्रेन से उतरने के पहले ही नित्य कर्मों से निपट चुका था। बस स्टैंड की ओर रवाना होने में अभी देर थी। सोचा कुछ पेट-पूजा ही कर ली जाए।

पास ही एक गुमटीनुमा जगह पर गुरुमुखी में लिखा बोर्ड दिख रहा था ‘भरवाँ आलू परांठे, मूली, गोभी, आमलेट पराँठे’

 

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ऑर्डर देते ही अलादीन के चिराग सरीखे खाने की चीज सामने हाजिर हो जाने की आम हिंदुस्तानी मानसिकता का पालन करते हुए मैंने भी उधर का रूख कर लिया। बड़ा सा आलू का पराँठा और साथ में गर्मागर्म चाय का बड़ा सा गिलास। आराम से अलाव के पास पड़े बैंच पर बैठ कर स्वाद ले ले कर आलू का पराँठा ख़तम करते लगा कि अभी भूख अभी कम नहीं हुई है सो एक आमलेट पराँठे का आदेश दे दिया।

थोड़ी देर बाद ही मेरे सामने ‘छोटू’ पराँठे की थाली ले कर खडा था। उसके हाथ से थाली ले कर इंतज़ार करने लगा कि जब आमलेट आए तो फिर चाय की चुस्कियों के साथ उसे भी उदरस्थ किया जाए।

लेकिन यह क्या!? 5 मिनट बीत गए, 10 मिनट बीत गए आमलेट का कोई अता-पता नहीं! थोड़ा नाराज़ होते हुए सामने दिखे ‘छोटू’ को आवाज़ लगाईं कि आमलेट कब देगा….? वह भागता हुआ ‘मालिक’ के पास गया। तब वह ‘होटल’ वाला हाथ में लट्ठ जैसा बेलन लिए मेरी और बढ़ा और मुस्कुराते हुए बोला कि पहली बार आमलेट पराँठा खा रहे हो? ‘बाहर’ से आए लगते हो! मैं भड़क उठा ‘पराँठा इस सर्दी में कुल्फी जैसा ठंडा हो रहा और आपको चुहलबाजी की पड़ी है।’ बंदे ने कहा कि ‘काक्का, जैसे आलू पराँठे में आलू पराँठे के अंदर रहते है, गोभी पराँठों में गोभी भी अंदर ही होती है इसी तरह आमलेट पराँठे में आमलेट भी पराँठे के अंदर ही है, देख तो लेते!

मैं हैरान सा पराँठे को घूरने लगा। अब उस ‘होटल’ वाले को समझ आ चुका था कि मैंने पहली बार आमलेट पराँठा देखा है। उसने मेरी प्लेट में पड़े पराँठे की ऊपर्री परतों को किनारे से उधेडा और कुछ ही पलों में पराँठे के अंदर बारीक कटे प्याज, हरी मिर्च सहित भरा-पूरा आमलेट नमूदार हो गया। जैसे किसी ने आमलेट बना कर पराँठे के अंदर रख दिया हो

वह तो मुस्कुराते हुए मुझे छोड़कर चलते बना लेकिन मैं ‘आमलेट-पराँठा’ खाते खाते यही सोच रहा था कि साबुत आमलेट पराँठे के अंदर कैसे पहुंचा?

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साबुत आमलेट पराँठा देख कर मैं हैरान रह गया
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साबुत आमलेट पराँठा देख कर मैं हैरान रह गया” पर 35 टिप्पणियाँ

  1. aaj ab ja kr bhook lgi.din bhr kuchh nhi khaaya .socha khana khaa loon.aur schchi वीर जी की पोस्ट पर नजर पद गई.एक सांस मे पढ़ गई.आमलेट परांठा??????? आश्चर्य ! कई तरह के परांठे बना लती हूँ.भरावन जरा सा गीला हो जाए तो परांठे बेलने मे बड़ी दिक्कत आती है.फिर……….अंडे से परांठा बनता कैसे होगा? आपने सिखा? दिसम्बर मे मैं आ रही हूँ.अब मुझे दुनिया की कोई ताकत नही रोक सकती वहाँ आने से . :Tounge-Out: भले पैदल आऊँ. :Angel: ही हा.और लिखो ‘ऐसे’ आर्टिकल्स.जा रही हूँ रसोई मे :Cry:

    • :Pleasure:

      मैंने वहीं देखा था
      कि
      कैसे बनता है ‘वो वाला’ आमलेट पराँठा

      कईयों को हैरान भी किया है बना-दिखा कर

  2. तवे में बेले हुए परांठे को डालकर उसे पलटने के बाद साइड से परांठे का एक तह ऊपर करते हुए उसमें आमलेट वाला लिक्विड डाल दिया जाता है , एक ही साथ पराठा और आमलेट दोनो तैयार हो जाते हैं !!

    • :Approve:

      संगीता जी को पूरे नंबर
      प्रथम सही ज़वाब देने के लिए

      यही है विधि ‘उस’ पराँठे की
      सिकने जा रहे पराँठे के किनारे से ज़रा सी जगह बना कर उसकी दोनों परतों के बीच अंडे का घोल डाला जाता है और फिर साबुत आमलेट समा जाता है पराँठे के अंदर

      संगीता जी अंडे नहीं खातीं लेकिन विधि बिलकुल सही बताई उन्होंने

  3. आमलेट परांठा तो कभी नहीं खाया पर हाँ अमृतसर के कई कई दिनों के प्रवास के दौरान परांठे बहुत खाए है| पंजाब जैसे परांठे कहीं और होटलों पर तो नहीं मिले|
    टिप्पणीकर्ता रतन सिंह शेखावत ने हाल ही में लिखा है: नहीं बदलते राजपूत समाज में महिलाओं के सरनेमMy Profile

  4. @ संगीता पुरी ,
    सबसे पहले संगीता पुरी जी को 80 प्रतिशत मार्क्स ! 20 प्रतिशत मार्क्स इसलिए काटे कि उन्होंने विधि डिटेल में नहीं बताई 🙂

    @ आमलेट पराठा 1,
    लट्ठ से अच्छे अच्छों का पानी उतर जाता है फिर आप , होटल वाले के हाथ में लट्ठ जैसा बेलन देख कर क्यों नहीं समझे कि अंडा पराठे के अंदर कैसे गया होगा 🙂

    @ आमलेट पराठा 2,
    आपने गेंहू के खेत में परिंदों (आप मुर्गियां कह लें) को घुसते नहीं देखा होगा तभी तो समझे नहीं कि ये काम्बीनेशन आगे भी रंग लाता रहेगा 🙂

    @ आमलेट पराठा 3,
    जब एक साबुत मुर्गी , साबुत अंडा देती है तो आमलेट पराठा साबुत क्यों नहीं होना चाहिए था 🙂

    @ आमलेट पराठा 4,
    ओये काके ,ऐसी ‘सीधी सीधी’ पोस्ट लिखोगे तो कईयों को ‘उल्टी’ हो जायेगी 🙂

    • :Pleasure:

      संगीता जी ने विधि डिटेल में इसलिए नहीं बताई क्योंकि वे अंडा नहीं खातीं

      आमलेट पराठा 1:
      ध्यान आमलेट की तरफ था
      क्योंकि स्वाद आमलेट का तो मालूम था
      बेलन का नहीं
      उसका स्वाद बाद में चख पाया

      आमलेट पराठा 2:
      गेंहू के खेत में मुर्गियां ?
      u means, chicks in field?

      आमलेट पराठा 3:
      बेशक मुर्गी अंडा देती है लेकिन आमलेट के बारे में मुर्गी से ज़्यादा जानता हूँ

      आमलेट पराठा 4:
      अब जैसा हूँ वैसी ही पोस्ट लिखूंगा ना!

  5. हम्म.
    हो सकता है कि परांठा बनाने के बाद उसे साइड से उधेड़ कर उसमें परांठा घुसेड़ फिर से सिल दिया जाता हो (क्योंकि मुर्गी गर्म परांठे में घुस कर अंडा दे आती हो, यह ज़रा मुश्किल सा लगता है)
    🙂

  6. कैसे बना होगा वह पराठा यह तो जानता नहीं किन्तु मुझे लगता है कि पराठा बनाते समय उसके भीतर इंजेक्शन के द्वारा अण्डे की जर्दी वाले घोल को पहुँचा दिया होगा। 🙂
    टिप्पणीकर्ता जी.के. अवधिया ने हाल ही में लिखा है: इतनी शक्ति हमें देना दाता… लोकप्रिय फिल्मी गीतMy Profile

  7. अपुन न ऐसे परांठे खाते हैं न रूचि है,क्योंक शाक-भाजी वाला आदमी हूँ.वैसे आपके साथ जैसा हुआ,बड़ा दिलचस्प लगा !
    टिप्पणीकर्ता संतोष त्रिवेदी ने हाल ही में लिखा है: प्रवीण त्रिवेदी : ब्लॉगिंग के मास्टर !My Profile

  8. आमलेट के परांठे का स्वाद तो आपने लिया | परन्तु इसे एक लेख के रूप में बढ़िया अंदाज़ में प्रस्तुत किया एक अलग व नए अंदाज़ में अपनी शख्सियत के अनुरूप |
    टिप्पणीकर्ता विनीत नागपाल ने हाल ही में लिखा है: ye zindagiMy Profile

  9. अरे पापे! बडी सरल सी बात है, अंडे तो आटे की लोई में रख दिया और बेल दिया, तवे पर सेख दिया…. लो आमलेट पराठा तैयार.. है कि नै:)
    टिप्पणीकर्ता चंद्र मौलेश्वर ने हाल ही में लिखा है: राजनीति और राष्ट्रीय पहचानMy Profile

  10. अगर मैं गलत नहीं तो शायद कलकत्ते में ऐसा ही कुछ ‘एग्ग रोल’ के नाम से भी मिलता है … दरअसल कभी खाया नहीं इस लिए कुछ ठीक ठीक जानकारी नहीं है !
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: बाल दिवस के २ अलग अलग रूपMy Profile

  11. एग रोल में आमलेट रोटी के ऊपर चिपका होता है जबकि परांठे में आमलेट दो पर्तों के बीच में होता है.

    यह तो हो गया पर पाबला जी यह बताइए क्या अपने या किसी ओर ने कभी तली हुई आइसक्रीम (Fried Ice cream) खायी है?

    हा हा हा हा …..

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