सारा जीवन अंधकारमय हो गया नए साल पर

2011 बस जाने ही वाला था। 2012 आने की खुशी लोगों से छुपाए नहीं छिप रही थी। हिलते मिलते संगी साथी अपने अपने कार्यक्रम बना बता रहे थे।

मैं देखते सुनते जा रहा था कि रस वाले शनि के दिन ही सोम की सोच रहे, कोई ठान कर बैठा कि देगा पड़ोसी को टक्कर, सोणी के दिमाग में था गहने का चक्कर, किसी ने चमकदार तारे टाँगे, किसी की आँखों में दिख रही थी मुर्गे की टाँगे।

कोई कोशिश कर रहा था भरसक कि देख ले अच्छा सा कॉमेडी सरकस, किसी के चेहरे पर थी मुस्कान कि मिलेंगे बढ़िया पकवान, कोई ज़िंदगी से हो चला था बेज़ार, कोई कर रहा था अपनों का इंतज़ार।

अपने राम किसी और ही धुन में थे। पाश्चात्य नव-वर्ष से धीरे धीरे मोह-भंग हो चुका। अब तो अपनों की इच्छानुसार चलना पड़ता है। खैर, बात इंटरनेट पर हो रही तो उसी के बारे में बताना ज़्यादा अच्छा।

power net

31 की तारीख का अपना प्लान ये था कि 2011 की शुरूआत में जोर शोर से घोषित की गई 11 वेबसाईट्स की योजनायों को पूरा होने की सिलसिलेवार जानकारी दी जाए। एक बड़ी सी पोस्ट लिखी जाए इन सबके बारे में, तसल्ली से। तैयारी भी कर ली थी 20 तारीख से लिखते हुए

लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था। 31 की दोपहर जब सोने गया तो करीब एक पैराग्राफ़ बाकी रह गया था 2011 की आखिरी पोस्ट में। शाम को जब उठा तो चारों तरफ़ दिखा अंधेरा! बाहर खामोशी से हो रही थी आसमान से बूंदाबांदी। चाय की चुस्कियाँ लेते हुए अभी दो पंक्तियाँ ही और जोड़ पाया था कि सच में ही आँखों के सामने हो गया अंधेरा! अरे ये क्या हुआ?

कुछ सेकेंड बाद समझ आया कि बिज़ली चली गई है और उसके पीछे पीछे उसका काम संभालने वाला यूपीएस भी नए साल की खुशी में अपनी ज़िम्मेदारी भूल कर चलते बना।

खोजबीन हुई तो पता चला कि यूपीएस की सहयोगी बैटरी रूठी हुई है क्योंकि कई महीनों से उसका गला ही तर नहीं कर पाए थे हम। बेचारी सूखी प्यासी पड़ी थी। करे भी ती तो क्या करे।

बाहर बारिश ने ज़ोर पकड़ लिया था। जैसे किसी आपदा के वक्त विदेशी मदद काम आती है वैसे ही ऐसे वक्त पर साथ दिया चीन में बने 24-32 एलईडी वाले बल्बों ने। जिन्होंने सारे घर में रौशनी बिखेर दी। जिन्हें देख मुझे, 40 साल पहले गाँव वाले घर में ख़ास मौकों पर इस्तेमाल किए जाने वाले चमकदार, भांय भांय करते पेट्रोमैक्स की याद आती रही।

हमने भोजन भी कर लिया लेकिन उस बेवफ़ा को नहीं आना था सो नहीं आई। इंतज़ार करते कब आँख लग गई, पता ही नहीं चला।

सुबह सबेरे एकाएक उसकी झलक दिखी तो मन झूम उठा। लेकिन बेचारे कम्प्यूटर ने अभी बूट की तरफ़ देखा ही था कि मैडम जी भाग खड़ी हुई।

दोपहर 11 बजे के आसपास ऐसा लगा कि अब सब ठीक हो गया है। डरते डरते कम्प्यूटर चालू किया गया क्योंकि वैसे ही पहले 8-10 बार बिन बताए हार्ड-डिस्क को झटके देती बिज़ली चलते बनी थी।

लेकिन यह क्या? मुँह चिढ़ाते इंटरनेट देव की खिड़की बता रही थी error 651। दो-तीन बार कोशिश करने के बाद पता चला कि बीएसएनएल टेलीफोन लाईन से डायल टोन ही गायब है। बस हवा के झोंकों जैसी कुछ आवाज़ें गुनगुना रहीं। गुरूप्रीत के कमरे वाले कनेक्शन का भी वही हाल मिला।

रविवार का दिन, नए साल का पहला दिन। फिर भी बीएसएनलिया मित्र को धमकाया गया। खबर पक्की हुई कि सारा एक्सचेंज ही नए साल के हंगामे के बाद खामोशी से बैठ गया है।

किस्सा कोताह यह कि उस दिन ना तो झाड़ू लगा पाए, ना ही कपड़े धो पाए, ना ही आटा गूँथना पड़ा। अरे भई! वैक्यूम क्लीनर, वाशिंग मशीन, फूड प्रोसेसर जो काम नहीं कर पाए। और तो और बड़े चाव से उस रात टर्मिनेटर 3 देखने की तमन्ना भी किनारे धरी रह गई। बस, लंबी सी तान के सोते रहे।

हम एक ही गाना गुनगुनाते रहे”…झलक दिखला जा/ झलक दिखला जा/ एक बार आजा आजा आजा आ जा…” लेकिन कम्बख्त बिजली को टिकाव मिला ट्रांसफार्मर बदले जाने से 4 जनवरी की दोपहर को और घिसटते लंगड़ाते इंटरनेट देव की भरपूर कृपा, पुणे सर्वर को मना कर हुई है अभी, आज 6 जनवरी की शाम को।

इस बीच 2 जनवरी की रात फेसबुक पर लिख आया था कि

सारा जीवन अंधकारमय हो गया नए साल पर
सुबुक सुबुक 🙁

अब कहीं जा कर दो लाइन लिखने लायक हुआ हूँ
चलता हूँ, लौट कर पता नहीं कब मिल पायूँगा 🙁

अब लगता है सब ठीक ही है। लेकिन वो सारा उत्साह कहीं खो गया है। तलाशता हूँ उसे और फिर मिलते हैं, ब्रेक के बाद नए उत्साह के साथ।

सारा जीवन अंधकारमय हो गया नए साल पर
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सारा जीवन अंधकारमय हो गया नए साल पर” पर 30 टिप्पणियाँ

  1. उस दिन आपके फेसबुक प्रोफाइल पर भी आपके ही अनोखे अंदाज़ में इसका जिक्र देखा था … जब तक आपसे बात नहीं हो गई … तसल्ली नहीं हुयी थी … खैर … अंत भला तो सब भला … 😉
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: सैनिक धर्मMy Profile

  2. बड़ा ज़ालिम गुजरा साल का पहला दिन!!!!

    मुझे लगता है की अब समय आ गया है “बिजली” देवी के जगह जगह मंदिर बनाने का, सुबह शाम उनकी पूजा-अर्चना की जाय, साइड में नेट बाबा की कुटिया भी छा दी जाए…क्या कहते हो आप?
    टिप्पणीकर्ता देवांशु निगम ने हाल ही में लिखा है: प्यार, इश्क, मोहब्बत और लफड़े…My Profile

  3. तो आप साथ साल की आज़ादी से मिले सुख का उपभोग कर रहे थे, जिसके अंतर्गत गाँव गाँव में बिजली, पानी पहुँच चुका है.. हम खामखाह यह मान बैठे थे कि आप आंग्ल नववर्ष से इतने नाराज़ हैं कि जब तक लोग भूल न जाएँ जश्न तब तक आप प्रकट न होने की कसम खा चुके हैं!! वैसे आपको लाईट मुबारक, बिजली मुबारक!! भगवान २०१२ वोल्ट जलाए रखे आपके जीवन में!!
    टिप्पणीकर्ता सलिल वर्मा ने हाल ही में लिखा है: दस्तखतMy Profile

  4. हे भगवान ! शीर्षक पढकर लगा जाने क्या बताने जा रहे हैं आप! पूरा पढ़ा तब धड़कन कम हुई.धत्त सचमुच दुष्ट हो ! Wink

  5. हम कम्पयूटर और ब्लॉगिंग को ही पूरा जीवन क्यों मान बैठे हैं?
    बिजली तो चाहती थी कि आप नये साल का स्वागत बारिश की बूंदों की रिमझिम सुनकर करें।

    प्रणाम

  6. अरे पाबला जी , जब इतने पहले तैयारी शुरू कर दी थी तो पोस्ट को स्ड्युल ही कर देते ।
    फिर सारी जिम्मेदारी गूगल बाबा की होती । 🙂

    खैर , देर से ही सही । नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकारिये ।

  7. मैं भी वेबसाइट पर जाने की सोच रही हूँ, काम तो शुरू हो गया है, देखो कब पूरा होता है। आवश्‍यकता पड़ी तो आपसे भी परामर्श लूंगी।
    टिप्पणीकर्ता ajit gupta ने हाल ही में लिखा है: तो विदा 2011, क्‍या करें तुझे सर्दी में ही विदा करना पड़ रहा है!My Profile

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