स्ट्रीट व्यू से घर पर दस्तक दी तो दिखी उनकी हैरानी, ख़ुशी और दहशत

गूगल के स्ट्रीट व्यू से दुनिया की सैर कैसे की जा सकती है,जानिये इस रोचक संस्मरण के सहारे

लगभग डेढ़ वर्ष पहले, 2010 के शुरूआती हफ्ते में GTalk पर कनाडा निवासी, काव्य मंजूषा वालीं स्वप्न मंजूषा शैल ‘अदा’ से बतियाते एकाएक मैंने उनकी वेबसाईट (ब्लॉग नहीं) पर नज़रें दौड़ाईं. घर का पता उसी में दिख गया. चुहलबाजी करते हुए मैंने उनसे कहा कि आपसे मिलने आ रहा हूँ. उन्होंने भी हँसते हुए पूछा कब आयेंगे? मैंने कहा कि आप ही के मुहल्ले में खडा हूँ लेकिन घर कौन सा है पता नहीं चल रहा!

उस समय भारत में आधी रात होने जा रही थी लेकिन वहाँ, कनाडा में दोपहर का समय था. मैंने बताया कि बस एक घर के सामने हूँ अभी और साथ ही साथ उन्हें उस घर की फोटो भेज दी ई-मेल में. फोटो देखते ही उनकी चीख सी आई “ये तो हमारा घर है! ये मेरी कार, ये उनकी कार!! सच बताईए आप कहाँ हैं?” मैंने फिर कहा कि आपके घर के सामने ही तो खड़ा हूँ.

जाँच करने के नाम पर पूछा गया कि बाहर दरवाज़े के पास क्या है? तुरंत ही मैंने दूसरी फोटो भेज दी जिसमे लकड़ी की आदमकद सफ़ेद मूर्ति दिख रही थी और दो कुर्सियाँ भी.

रही सही कसर पूरी कर दी ऊपरी मंजिल पर खिड़कियों की फोटो ने! जिसमे अंदर की ओर परदे खिंचे दिख रहे थे. एक रोमांचक संदेश उभरा कि इसी खिड़की के पीछे ही तो मेरा कम्प्यूटर है!! शुक्र है पर्दों पर खर्चा किए गए पैसे वसूल हो गए. 😀

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मैंने उनके घर के चारों ओर के दसियों फोटो भेजे और तसल्ली दी कि मैं भिलाई में ही बैठा हूँ चिंता ना करें. वे पूछती रहीं कि ये सब कैसा हुया? मैंने टाल दिया कि कभी लिख कर बता दूंगा और देखिए वो दिन आया है आज. हालाँकि उन्होंने तुरंत ही इस बारे में लिखा और अपने घर के भीतर के कुछ शानदार चित्र दिखाए.

यह सब संभव हुआ गूगल की एक तकनीक से. गूगल मैप्स की तकनीक से. इसका उपयोग आप भी कर सकते हैं. Google Maps में स्ट्रीट व्यू नाम की सुविधा आपको किसी स्थान पर 360-अंश की सड़क स्तर के दृश्यों द्वारा स्थानों का जायजा लेने देती है. चाहे आप किसी क्षेत्र के स्थानों को देख रहे हों या आप किसी खाने पीने की जगह में जाने से पहले उसे देख सकते हैं, छुट्टियों पर कहीं जाने से पहले किसी ख़ास इलाके के सुंदर स्थानों को ढूंढ सकते हैं या घर बदलने लेने के पहले आस पड़ोस देख सकते हैं.

फिलहाल दिक्कत यह है कि भारत में यह सुविधा कुछ कानूनी अड़चनों के कारण सांकेतिक रूप में ही दी जा रही है. कुछ विकसित देशों को छोड़ बाक़ी देशों में भी किंचित यही स्थिति है.

आइए देखें ये सब किया कैसे जाता है 🙂

गूगल मैप्स
गूगल मैप्स में एक मानव के आकार वाले नारंगी चिन्ह को कम्प्यूटर माऊस द्वारा घसीट कर
उस जगह छोड़ दें जहाँ का नज़ारा देखना चाहते हैं
Google Maps
जैसे ही वह मानव आकृति अपनी जगह से घसीटी जाएगी
वैसे ही नक़्शे पर वह स्थान, सड़कें नीले रंग से घिरे नज़र आने लगेंगे
जहाँ के दृश्य आप देख सकते हैं.
Street View
जहाँ इस मानवाकृति को छोड़ा जाएगा वहाँ चारों ओर के सारे दृश्य स्पष्ट देखे जा सकते हैं.
नीचे दाएँ किनारे पर उस क्षेत्र पर ‘आपका’ स्थान दिखता रहेगा

इन सबका विस्तृत विवरण हिंदी में इस लिंक पर जा कर देखा जा सकता है.

बस, इसी तकनीक का उपयोग कर हमने ‘अदा’ जी के चहरे पर हैरत के भाव ला दिए. ऐसा ही एक बार उड़न तश्तरी समीर लाल जी के घर भी पहुंचे थे, राम चन्द्र मिश्रा जी के घर और मशाल वाले दीपक चौरसिया के घर भी!

इस तकनीक में गूगल, धरती के भूगोल का सारा चित्रण करने के लिए जमीन पर चल सकने वाले सभी तरह के वाहनों का प्रयोग करता है. इनमे मुख्य है गूगल की सुसज्जित कार. जिसमें 15 लेंस है जो 360 अंश के फ़ोटो लेते हैं. इसमें इसकी स्थिति को देखते रहने के लिए GPS उपकरण, गति सेंसर, डेटा संगृहीत करने के लिए हार्ड ड्राइव, सारी प्रणाली को चलाने वाला एक छोटा कंप्यूटर और ‘स्ट्रीट व्यू’ दृश्यों में दूरियों का निर्धारण करने हेतु त्रिआयामी डेटा के लिए लेज़र भी हैं.

हालांकि इस ‘स्ट्रीट व्यू’ की अपनी सीमाएं हैं. ‘स्ट्रीट व्यू’ में सार्वजनिक सड़कों के और आसपास के वह दृश्य होते हैं जो आम तौर पर आपके खुद के द्वारा सड़क पर वाहन चलाते या पैदल चलते समय देखे जाने वाले होते हैं. इसमें वही दृश्य दिखते हैं जिन्हें गूगल के वाहन उस दिन ‘देख’ पाए थे जब वे उस स्थान से गुज़रे थे. बाद में, लिए गए दृश्यों के ऑनलाइन दिखाई देने के पहले पूरी तरह व्यवस्थित करने में कुछ महीने भी लग जाते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि ‘स्ट्रीट व्यू’ पर जो चित्र दिखते हैं वह कुछ महीने से लेकर कुछ वर्ष पुराने भी हो सकते हैं.

और एक बात! इन दृश्यों में जितने भी चेहरे या वाहनों की नम्बर प्लेट होती हैं उन्हें अत्याधुनिक तकनीक द्वारा स्वचालित रूप से धुंधला कर दिया जाता है, जिससे उस व्यक्ति या वाहन की पहचान नहीं की जा सकती है. फिर भी अगर प्रक्रिया में कुछ छूट गया हो, तो गूगल को बताया जा सकता है धुंधला करने के लिए या फिर शिकायत करने पर वह सारा चित्र भी हटा दिया जाता है. 2010 में तो ढाई लाख जर्मन नागरिकों ने गूगल से कहा था कि वो उनके घरों की तस्वीरें धुंधली कर दे.

भारत में गूगल ने पिछले वर्ष इस परियोजना की शुरुआत की थी जिससे गूगल के उपभोक्ता 360 डिग्री कोण से बंगलौर की सड़के देख सकें. कारों और ट्राइसिकल्स पर कैमरे लगाकर पूरे शहर की तस्वीरें इकट्ठा की जा रही थीं. लेकिन बंगलौर के पुलिस कमिश्नर ने इसकी मनाही कर दी यह काम रूक गया. पुलिस का कहना है कि उसने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपत्ति उठाई.

इस ‘स्ट्रीट व्यू’ तकनीक का लाभ उठाते हुए मैं अक्सर ही कई देशों की सैर पर निकल जाता हूँ कभी किसी गाँव का हाल देखता हूँ, कभी किसी महानगर के व्यस्त चौराहे पर खडा रहता हूँ, कभी कभी कई ऐसी तस्वीरें कैद हुई दिखती है जो सार्वजनिक नहीं की जा सकती. तो कभी ऐसे दृश्य दिखते हैं कि लगता है अपना हिन्दुस्तान कहीं ज़्यादा साफ़ सुथरा है.

अब बताईए, चुपके से किसके घर, मोहल्ले, शहर घूमना चाहते हैं आप?

स्ट्रीट व्यू से घर पर दस्तक दी तो दिखी उनकी हैरानी, ख़ुशी और दहशत
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41 comments

  • Kajal Kumar says:

    हे भगवन.

  • ashok saluja says:

    वाह ! जी वाह!
    जिधर देखता हूँ …तुसी ही तुसी हो ! हा हा हा …
    खुश रहो !

  • ashok saluja says:

    वाह ! जी वाह!
    जिधर देखता हूँ …तुसी ही तुसी हो ! हा हा हा …
    खुश रहो ! हुन ठीक ऐ …….
    टिप्पणीकर्ता ashok saluja ने हाल ही में लिखा है: गुज़रे कल का प्यार …और आज का प्यार ???My Profile

  • कुछ और गुल खिलाईये न 🙂
    टिप्पणीकर्ता arvind mishra ने हाल ही में लिखा है: गुरु ,गुरुघंटाल और ब्लागजगत के अफ़सानेMy Profile

  • अब तो बैठे बैठे हर जगह घूमना हो सकता है..
    टिप्पणीकर्ता प्रवीण पाण्डेय ने हाल ही में लिखा है: रूठ गया निष्कर्ष दिशा सेMy Profile

  • खतरनाक मामला है 🙂

  • जहाँ ऐसी तकनीक से लाभ है, वही ऐसी तकनीक सुरक्षा कारणों के कारण खतरनाक भी है….. भारत में इन्ही सुरक्षा कारणों के लिए लागु नहीं हो रही है….
    क्योंकि यह भारत के लिए खतरानक है….. Thinking

    • बी एस पाबला says:

      Worry
      जहां विध्वंस होना है वह तो बिना किसी ऎसी जानकारी के भी होगा

  • shobha gupta says:

    जी इस तकनीक का मैं भी प्रयोग कर रही हूँ पर इस से ताज़ी तस्वीरे नहीं दिखाई देती है मेरी बेटी अमेरिका में है मैंने उसको भी ये बताया तो उसने कहा कि यहाँ और निर्माण हो गए है फिर मैने नीचे ध्यान दिया तो तारीख २००७ की दे रखी थी. हाँ पर बिटिया का घर देख लिया.

    • बी एस पाबला says:

      Heart
      कितनी तसल्ली मिलती है ना दूर बैठे सब देख लेने की!

      • shobha gupta says:

        जी, बेटी का घर अन्दर से वेबकैम के सहारे और बाहर से स्ट्रीट
        व्यू से देख लिया . मन को बहुत अच्छा लगता है मानो साथ ही है

  • ajit gupta says:

    अब यह तो पक्‍का हो गया कि आप कम से कम हमें हैरत में नहीं डाल सकते है।

    • बी एस पाबला says:

      Pleasure
      तकनीक और भी है ज़माने में स्ट्रीट व्यू के सिवा!

  • का पाबला जी,
    आप फिर ताका-झांकी शुरू कर दिए का 🙂
    आपने मुझे सच में वो दिन याद दिला दिया…मुझे कितनी घबराहट हुई थी आपको मालूम ही है..
    लेकिन बहुत ही प्लेजेंट सरप्राइज दिया था आपने..
    बहुत ही अच्छी पोस्ट…
    धन्यवाद नहीं कहूँगी…:)

  • t s daral says:

    बड़ी खतरनाक तकनीक है बादशाहों . 🙂

    • बी एस पाबला says:

      Smile
      सही इस्तेमाल हो तो कोई दिक्कत नहीं

  • चलो भारत में रहने का एक फ़ायदा तो हुआ कि अपनी प्राईवेसी बनी रहेगी ।
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: जेद्दाह में सप्ताहांत, टैक्सीवाले की बातें, निराला में भोजन, मुशर्रफ़ और एमग्रांड कार (Weekend in Jeddah, Taxiwala, Lunch In Nirala, Musharraf and Emgrand Car)My Profile

  • भरता में इस तकनिकी पर प्रतिबन्ध होना चाहिए…क्योंकि भारत में सुरक्षा के मानक अभी भी सही नहीं हैं…
    कहते हैं मुम्बई हमले के लिए आतंकवादियों ने गूगल मैप से बहुत कुछ जाना था…भारत में अन्दर के लोगों से ही इतना ख़तरा रहता है..बाहरी दुश्मनों को ऐसी तकनिकी से मदद ही मिलेगी ..भारत में जेड सेक्युरिटी के हक़दार शाहरुख़ खान जैसे इने गिने लोग ही हैं..आम आदमी तो ख़ुद ही ख़ुद को बचा ले, तो उसकी खुशकिस्मती होगी, असुरक्षा एक तरफ से नहीं है, हर तरफ से समस्याएं हैं…मौसम की मार से, भ्रष्ट सरकार से, मंहगाई की धार से, बाबाओं की पुचकार से, आतंकवादियों और नक्सलियों के अत्याचार से…इनसे जूझने में ही लोगों की उम्र निकाल जाती है, ये नया शोशा नहीं चाहिए…पाकिस्तान, जैसे कितने देश है, जो भारत की कमज़ोर नस की तलाश में ही रहते हैं, कब कहाँ कैसे बम फट जाए कुछ पता नहीं…पार्लियामेंट तक तो सुरक्षित नहीं है…और क्या सुरक्षित होगा भला..
    इसलिए गूगल मैप बिल्कुल अवैध होना चाहिए भारत में…
    टिप्पणीकर्ता Swapna Manjusha ‘ada’ ने हाल ही में लिखा है: हिन्दुत्व ! तेरी यही कहानी….My Profile

    • बी एस पाबला says:

      I-see-stars
      मोबाइल हो या माइक्रोवेव! आम इंसान जिस तकनीक को पा कर इतराता है वह तकनीक तो फौज जैसी खुफिया बलों की इस्तेमाल हो चुकी नाकारा घोषित तकनीक होती है.

      आज अगर गूगल जैसों की यह सेवा बंद हो जाए तो क्या विध्वंसकारी तत्वों के सर्वशक्तिमान सरपरस्त इससे भी उन्नत तकनीक की सहायता नहीं ले सकते? वर्षों पहले से ऐसे उपग्रह मौजूद हैं जो मेरे हाथ में पकडे पेन की कंपनी का नाम तक पढ़ लें. ये हकीकत है जी.

      ताज़ा मामले के अनुसार, मुम्बई स्टेशन से बच्चा चुराते व्यक्ति को मालूम होता कि वो सीसीटीवी की निगाह में है तो क्या वह यूं ही बच्ची को उठा लेता? ज़रूर कोई दूसरा रास्ता अपनाता लेकिन जुर्म ज़रूर करता

      वह अपने आप को बचा लेता क्योंकि “जानकारी ही बचाव है” 😀
      बस यही मूलमंत्र है

  • ePandit says:

    कमाल की तकनीक है। गूगल जो करे सो कम।
    टिप्पणीकर्ता ePandit ने हाल ही में लिखा है: नैक्सस ७–गूगल का सस्ता क्वाड कोर टैबलेट जारीMy Profile

  • अनु says:

    technology के लाख फायदे हैं तो कई नुक्सान भी………….
    🙂
    रोचक पोस्ट
    सादर
    अनु

  • अब तो थोडी फुर्सत निकालकर इसे ट्राई करना पडेगा।

  • वाह आदरणिय वाह, वाकई कमप्यूटर तेज़ है किन्तु आप से ज्यादा बुद्धिमान नहीं, मै अपना परम सौभाग्य मानता हूँ आपकी वेबसाइट का अवलोकन करने को …………..बस आदरणिय आप से दिशा निर्देश और मार्ग दर्शन चाहिये..और मुझे पूर्ण विश्वास है कि, अपना स्नेह मुझ पर सदैव बनाये रक्खेंगे।

  • Jignesh says:

    अद्‌भुत ; आप तो अंतरयामी निकले _/_

  • बेहतरीन जानकारी
    रोचक और मजेदार किस्सा

    तुसी ग्रेट हो

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