स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण और इंटरनेट की दुनिया

स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो की धर्म संसद में दिए गए भाषण वाली रिकॉर्डिंग की सच्चाई तलाशता लेख

एक माह पहले 8 मई को जब मैंने इंटरनेट के झूठ वाला लेख लिख कर बताया था कि किस तरह हालिया ख़बरों को किसी और घटनाक्रम की तस्वीरों के साथ दिखा कर भय, भ्रम, उन्माद फैलाया जा रहा है तो बहुत से मित्रों की तारीफें मिली सजग, जागरूक करने के इस छोटे से प्रयास पर.

उसके बाद भी जो अपडेट मिलते गए, उन्हें उसी लेख में जोड़ता चला गया. मित्र प्रकाश गोविन्द का सुझाव था कि ऐसी हर भ्रामक जानकारी के बारे में एक अलग लेख ही लिखा जाना चाहिए बजाय पुराने लेख में जोड़ते जाने के.

मेरे लिए हर बार अलग अलग लेख लिखना मुश्किल है अभी, इसलिए बात आई गई हो गई.

लेकिन आज जब मित्र शरद कोकास ने स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो भाषण वाली रिकॉर्डिंग की सत्यता जाननी चाही तो परिणाम देख कर निश्चय किया कि इस पर अलग से लिखा जाए. पिछला लेख तो मुख्यतया चित्रों के गलत इस्तेमाल का था इस बार तो ऑडियो रिकॉर्डिंग पर ऊंगली उठी है वो भी स्वामी विवेकानंद से संबंधित.

तो हुआ कुछ यूँ कि मैंने शरद जी को बताया कि सुना पढ़ा तो है हाल ही में लेकिन अभी तक वह रिकॉर्डिंग मुझ तक पहुंची नहीं है! उन्होंने कहीं से आई स्वामी विवेकानंद की वह रिकॉर्डिंग झट से  व्हाट्सएप्प पर भेजी और अपन जुट गए छानबीन में.

शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद
शिकागो धर्म संसद की इंटरनेट पर उपलब्ध तस्वीर

11 सितंबर 1893 को अमेरिका स्थित शिकागो शहर में आयोजित प्रथम धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए भाषण के अनमोल विचार हालाँकि पहले भी उनकी जीवनी पर आधारित निबंध में पढ़ चुका था लेकिन सुनने का रोमांच तो होता ही है.

सबसे पहले तो यही ध्यान गया कि 1893 के उस कालखंड में ऐसी कोई तकनीक अमेरिका में नहीं थी जो स्टूडियो के बाहर खुले में कोई आवाज़ रिकॉर्ड कर सके.

स्टूडियो में भी जो रिकॉर्डिंग की जा सकती थी उसके लिए वक्ता को सीधे एक ऐसे डायफ्राम के सामने बोलना पड़ता था जो एक घूमने वाले बेलनाकार आकृति पर सुई से जुड़ा  होता था. बोलने से हुई डायफ्राम की हलचल से सुई में जो कंपन होता, उसे एक तरह के प्लास्टिक से मढ़े सिलेंडर पर अंकित किया जाता था. Berliner Gramophone कहलाये जाने वाली इस तकनीक का ही परिष्कृत रूप बाद में ग्रामोफोन रिकॉर्ड के रूप में सामने आया.

1893 में जो यह तकनीक उपलब्ध थी, उसमें भी एक बाध्यता रही कि इसमें दो मिनट की ही आवाज़ रिकॉर्ड की जा सकती है. तो तकनीक के मामले में यह संभव ही नहीं है कि शिकागो में दिए गए स्वामी विवेकानंद के भाषण की कोई ऐसी रिकॉर्डिंग का अस्तित्व हो.

अब अगर ध्यान दिया जाए तो स्वामी जी के भाषण के पहले एक स्त्री स्वर उनका परिचय देता सुनाई दे रहा जो कि भ्रामक है.

स्वामी विवेकानंद जी ने शिकागो की धर्म संसद वाले भाषण बाद 2 नवंबर 1893 को अपने एक प्रशंसक Alasinga Perumal को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने बताया कि Dr Barrows ने उनका परिचय श्रोताओं से करवाया.

इसी पत्र में उन्होंने लिखा कि Brothers and Sisters of America कहते ही हॉल में ने दो मिनट तक तालियाँ बजती रहीं. जबकि इंटरनेट पर तैर रही रिकॉर्डिंग में तालियाँ कुछ सेकेंड ही बजती सुनाई देती हैं.

इस पत्र की प्रतिलिपि यहाँ क्लिक कर पाई जा सकती है.  Dr Barrows ( Dr. John Henry Barrows) का परिचय यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है. इस शिकागो भाषण से जुड़े घटनाक्रम का जायजा स्वामी जी की जीवनी से यहाँ क्लिक कर लिया जा सकता है.

The Vedanta के अगस्त 2010 अंक में छपा एक लेख

इसके समर्थन में चेन्नई के श्री रामकृष्ण मठ द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका The Vedanta के अगस्त 2010 अंक में छपा एक लेख भी देखा जा सकता है. जिसमें उपरोक्त बातें ही बताई गईं हैं.

लेकिन मेरे मन में प्रश्न उठा कि जब यह लगभग साबित हो ही गया कि इंटरनेट पर स्वामी विवेकानंद का भाषण बताई जा रही यह रिकॉर्डिंग झूठी है तो आखिर यह है क्या?

इंटरनेट पर फैली विवादास्पद ऑडियो रिकॉर्डिंग, जिसे लाल घेरे वाले तीर पर क्लिक कर सुना जा सकता है

फिर तो बस्स तीन मिनट लगे मुझे यह ढूंढ निकालने में कि यह रिकॉर्डिंग दरअसल स्वामी जी के भाषण की नाटकीय प्रस्तुति है जिसे आवाज़ दी है सुबीर घोष नाम के कलाकार ने. इंटरनेट पर फैलाई जा रही उपरोक्त रिकॉर्डिंग के प्रारंभ में ही कुछ पलों के लिए एक बातचीत सुनाई पड़ती है जो शायद दो अलग अलग रिकॉर्डिंग को जोड़ने की ‘कलाकारी’ करते रह गई! 😛

आजकल की बात की जाए तो यह महज़ स्वामी जी के भाषण का पठन है पॉडकास्ट सरीखे.  मैंने ऐसी कई कविताओं, कहानियों को आवाज़ देती मित्र युनूस खान और अर्चना चावजी की रिकॉर्डिंग सुनी हैं.

डबिंग कलाकार सुबीर घोष की आवाज़ में पढ़े गए स्वामी विवेकानंद जी के भाषण को नाटकीय रूप देने के लिए इसकी रिकॉर्डिंग को गुणवता के स्तर पर इस तरह तकनीक के सहारे बिगाड़ा गया है जिससे यह सदियों पुराना लगे.

स्वामी विवेकानंद के भाषण

सुबीर घोष की आवाज़ में स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो भाषण सहित अन्य भाषणों की नाटकीय प्रस्तुति वाली यह रिकॉर्डिंग व्यवसायिक रूप में बेची जा रही है जिसे mp3 फॉरमेट में केवल 9 रूपये का भुगतान कर प्राप्त किया जा सकता है. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक क्लिक करें.

Amazon.com पर स्वामी जी की इसी झूठी रिकॉर्डिंग को 4 डॉलर में धड़ल्ले से बेचा जा रहा. जबकि सारी बात बताते हुए 4 वर्ष पहले ही वहाँ फीडबैक दिया जा चुका कि यह गलत है. यहाँ क्लिक कर अमेज़न डॉट कॉम का वह पृष्ठ देखें.

MP3FIL वेबसाइट पर तो साफ़ साफ़ लिखा जा रहा कि download Subir Ghosh As Swami Vivekananda mp3 for free 🙂

सच जान कर आपको कैसा लग रहा?

© बी एस पाबला

अपडेट@ 12 जनवरी 2016

स्वामी विवेकानंद और जी टीवी का झूठ
12 जनवरी 2016 को जी टीवी एक कार्यक्रम में इसी रिकॉर्डिंग को सुनाते हुए स्वामी विवेकानंद की आवाज बता रहा 🙂
स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण और इंटरनेट की दुनिया
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31 comments

  • वाणी says:

    मैने तीन दिन पहले जानना चाहा था स्टेटस मे!

  • बढ़िया जानकारी दी है सर जी। इन्टरनेट के इस युग में सच की बजाय झूठ ज्यादा ही तेजी से फ़ैल रहा है खासकर सोशल मीडिया के द्वारा। सादर … अभिनन्दन।।
    टिप्पणीकर्ता हर्षवर्धन श्रीवास्तव ने हाल ही में लिखा है: आम बजट के कुछ दिलचस्प ज्ञान तथ्यMy Profile

  • राजेश अग्रवाल says:

    बहुत खूब..सच तक पहुंचने के लिए आप बड़ी मेहनत करते हैं..

  • सत्य की खोज करता सुन्दर सराहनीय आलेख है
    बधाई … आभार !!


    अभी दो-तीन दिन पहले ही व्हाट्स एप पर बहुत बड़ी सी पोस्ट एक सज्जन ने वितरित की थी ,,,
    उसका आशय इस प्रकार था कि चन्द्र शेखर आजाद की मौत जवाहर लाल नेहरु के कारण हुयी थी
    उसमें ये भी बताया गया था कि आजाद के पास भगत सिंह को जेल से छुडाने का मास्टर प्लान था जो कि नेहरु जी जान गए थे

    भारतीय जनमानस में ऐसे अनेकों भ्रम और मिथ्या किस्से फैले हुए हैं
    उन्हें सत्यता की कसौटी पर कसे जाना आवश्यक है
    टिप्पणीकर्ता प्रकाश गोविन्द ने हाल ही में लिखा है: छोटे तिवारी और बोर्ड की परीक्षा 🙂My Profile

    • बी एस पाबला says:

      Wink
      गल्प कथाओं का कोई कुछ नहीं कर सकता

  • शरद कोकास says:

    बहुत बहुत धन्यवाद पाबला जी , वाट्स एप के तमाम मित्रों को इस लेख का लिंक भेज रहा हूँ ,ताकि सरे देश में फैलाए जा रहे इस झूठ का पर्दा फाश हो . यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं कि यह षड़यंत्र पूर्वक किया जा रहा है , उन लोगों द्वारा जो देश को बहुत पीछे ले जाना चाहते हैं , ज्ञान के अन्धकार युग में , जानबूझकर धर्मान्धता फैलाई जा रही है . आपका यह प्रयास कम से कम पढ़े -लिखे लोगों की आँख तो खोलेगा , और उन अन्धविश्वासी लोगों की भी जो गोयबल्स के इस कथन में विशवास रखते हैं कि एक झूठ को सौ बार कहो तो वह सच हो जाता है ..

  • बहुत अच्छा प्रयास किया आपने। समय समय पर करते रहिये तो थोड़े से लोगों को भी अगर भ्रांतियाँ दूर हो गई तो बहुत अच्छा रहेगा।

  • आपको तो सायबर खोज विभाग बनाकर उसका हेड बना देना चाहिए smile emoticon iPhone
    टिप्पणीकर्ता Ratan Singh Shekhawat ने हाल ही में लिखा है: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग भर्तीMy Profile

    • बी एस पाबला says:

      Heart
      तारीफ़ का यह तरीका भी बढ़िया है
      शुक्रिया रतन सिंह जी

  • Gagan Sharma says:

    ज्ञानवर्धक, सार्थक लेख पर सच्चाई 🙁

  • Gagan Sharma says:

    स्टीकर गलत जगह जा चिपका है ….

  • महेश परिमल says:

    पाब्ला जी, आपको अब सत्यांवेषी कहा जाए, तो गलत नहीं होगा? कब्र खोदकर आप सच्चाई तलाश लेते हैं। स्साला मुर्दा भी झूठ नहीं बोल सकता आपके सामने ! बहुत ही अच्छा लगा।

    • बी एस पाबला says:

      Roses-are-red
      कब्र खोदू मजदूर!

      शुक्रिया महेश जी

  • Anupam says:

    थैंक यू अंकल. अच्छा लगा पढ़ कर. आज कल के व्हाट्सप्प ज़माने में जहा मटेरियल को जल्द से जल्द फॉरवर्ड करने की रेस है, इस बात पे विचार करते हुए डेविड हेनरी थोरो के द्वारा १८५४ में लिखी ये लाइन आज भी पुरानी नहीं लगती- “We are in great haste to construct a magnetic telegraph from Maine to Texas; but Maine and Texas, it may be, have nothing important to communicate…. As if the main object were to talk fast and not to talk सेंसिबली”

    • बी एस पाबला says:

      Approve
      सटीक उद्धरण है डेविड हेनरी का

      शुक्रिया अनुपम जी

  • आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-06-2015) को चर्चा मंच के 2000वें अंक “उलझे हुए शब्द-ज़रूरी तो नहीं” { चर्चा – 2004 } पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक

  • पिछले कुछ समय में स्वामी विवेकानंद को लेकर इतने मनगढ़ंत किस्से पढ़ने को मिले हैं कि दिमाग चकरा गया. जिस दौरान मोदी ने ओबामा को गीता भेंट की तो एक नया किस्सा पढ़ने में आया कि स्वामीजी को अमेरिका के तत्कालीन प्रेसिडेंट ने व्हाइट हाउस के खुफिया तहखाने में गीता की दुर्लभ प्रति दिखाकर यह बताया कि अमेरिका के सारे प्रेसिडेंट उसी को पढ़कर शासन करते हैं. इस सरासर फर्जी किस्से को किसी ने फेसबुक पर शेयर किया. जब मैंने उन्हें इसका झूठा होना बताया तो उन्होंने मुझे ब्लॉक कर दिया.

    एक और किस्सा कुछ दिन पहले फेसबुक पर घूम रहा था कि कैसे स्वामी विवेकानंद नें लंदन में कानून की पढ़ाई के दौरान अपने घमंडी अंग्रेज प्रोफेसर को भारतीयों की महानता से परिचित कराया था.

    • बी एस पाबला says:

      Sad
      मनगढंत बातें तो ऐसी होती हैं जैसे बंदा खुद स्वामी विवेकानंद के साथ चल रहा हो

      इनका कुछ नहीं किया जा सकता

  • Nitin Singh Kushwaha says:

    Dear sir, thanks a lot for this valuable information

  • पाबला जी नीचे एक ब्लाग का पता दे रहा हूं…..इस ब्लाग पर मेरा पूरा ब्लाग जस का तस कापी है….साथ में कुछ और लोगो की पोस्ट भी मौजूद हैं..जरा पता करके बताएं ये कोन से महाश्य हैं…..शायदा भारतीय नहीं हैं…
    http://pstua-worship.blogspot.in/2014_01_01_archive.html

  • आजकल इंटरनेट पर सच से ज्यादा झूठ ज्यादा फैल रहा है. आपकी यह पहल स्वागत योग्य व सराहनीय है .

  • kavita verma says:

    बढ़िया खोजबीन

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