शौकिया रेडियो, HAM रेडियो क्या है!

कल शाम, ज्ञानदत्त पाण्डेय जी से पहली बार उनके मोबाईल फोन पर बात हुई। स्वाभाविक तौर पर उनके साथ-साथ मुझे भी प्रसन्नता हुई, ब्लॉग जगत की आभासी दुनिया से अलग एक दूसरे से चहकते हुए बात कर पाने में।

वार्तालाप के कुछ देर बाद ही जब उनकी ताज़ा पोस्ट के बहाने ब्लॉग पर एक बार और नज़र मारी तो सतीश सक्सेना जी का आग्रह, टिप्पणी के रूप में दिख गया कि ज्ञानभाई ! होसकेतोइस HAM परएकपोस्ट अवश्यदें ! मैंने सोचा कि इसके पहले ज्ञान जी कुछ करें एक पोस्ट हम हीं क्यों न लिख डालें।

सतीश जी का कहना बिल्कुल ठीक है कि HAM रेडियो की तुलना इन्टरनेट से नही की जा सकती। किसी प्राकृतिक विपत्ति में जब सब साधन नष्ट हो जायें तो यही है जिससे शेष विश्व से संपर्क हो सकता है।

30-35 साल पहले के मुकाबले शौकिया रेडियो ऑपरेटर बनने व आनंद उठाने की प्रक्रिया में ज़्यादा अन्तर नहीं आ पाया है।

जैसा कि मैंने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विचारधारा कभी नहीं बदलती, मात्र व्यवस्था बदल जाती है। आज समय के साथ चलते हुए, शौकिया रेडियो ऑपरेटर की सहायता के रूप में कई software भी आ गए हैं।

एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM कहे जाने का कोई विशेष कारण ज्ञात नहीं है। कुछ व्यक्ति, इस तीन अक्षरों के शब्द HAM का सम्बन्ध, तीन महान रेडियो प्रयोगधर्मियों के नाम से जोड़ते हैं। वे हैं, हर्ट्ज (Hertz), जिन्होंने व्यवहारिक रूप में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का प्रदर्शन, 1988 में किया था, आर्मस्ट्रांग (Armstrong) जिन्होंने रेडियो तरंगों के लिए आवश्यक resonant oscillator circuit विकसित किया था और मारकोनी (Marconi) जिन्होंने वर्ष 1901 में अटलाण्टिक महासागर के आर-पार, पहला रेडियो संपर्क स्थापित किया था और वे वर्ष 1909 में भौतिकी के नोबल पुरस्कार विजेता भी रहे।

दूसरों के अपने संस्करण है, उन के अनुसार रेडियो संचार के शुरूआती दिनों के दौरान, सरकार ने शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को कुछ निश्चित फ्रीक्वेंसियों का उपयोग करने की अनुमति दी। शौकिया रेडियो स्टेशनों की frequency की स्थिति, उस समय बाक़ी फ्रीक्वेंसियों (की सारिणी) के बीच एक तरहHAM-sandwich सेsandwich जैसी थी। फैशन में था हैम सैंडविच (जैसे आजकल हैम बर्गर है) और इतना ही काफी था शौकिया रेडियो ऑपरेटर HAM को कहा जाने के लिए।

एक और अटकल लगाई जाती है कि इस शब्द HAM का अभिप्राय है Help All Mankind, जो कि प्राकृतिक आपदाओं में संकटग्रस्त व्यक्तियों, नागरिक आपात परिस्थितियों के दौरान सहायता देने के लिए इसकी सेवा के रूप को दर्शाता है।

वैसे शब्द, HAM का उपयोग 1908 में पहले शौकिया वायरलेस स्टेशन के हार्वर्ड रेडियो क्लब के कुछ शौकीनों द्वारा उपयोग किया गया था। ये व्यक्ति थे Albert S. Hyman, Bob Almy तथा Poogie Murray. उन्होंने अपने पहले स्टेशन को HYMAN-ALMY-MURRAY का नाम दिया। जैसा कि होता ही है, इस तरह का एक लंबा नाम, मोर्स कोड (Morse code) के द्वारा भेजा जाना, जल्द ही थकाऊ महसूस किया गया और एक संशोधन की गुहार हुयी।

फिर प्रत्येक व्यक्ति के नाम के पहले दो अक्षरों का उपयोग किया गया और हो गया HY-AL-MY। इसी बीच कुछ भ्रम की स्थिति पैदा होने लगी, जब एक शौकिया रेडियो स्टेशन HY-ALMU से और HYALMO नामक एक मैक्सिकन जहाज से संकेत प्राप्त होने लगे। फिर उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति के नाम का प्रथमाक्षर उपयोग करने का निर्णय लिया और बन गया HAM!

ham_work_bspablaशुरूआती दिनों में जब किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं हुया करता था, शौकिया रेडियो ऑपरेटर अपनी मर्जी से कोई भी frequency चुन लेते थे। कई बार तो उनका प्रसारण व्यवसायिक रेडियो स्टेशनों के मुकाबले ज़्यादा स्पष्ट होता था। परिणाम स्वरूप अमेरिकी कांग्रेस का ध्यान शौकिया रेडियो गतिविधि को सीमित करने के लिए की ओर गया।

1911 में, Albert Hyman ने, हार्वर्ड में शोध के लिए, विवादास्पद Wireless Regulation विधेयक को चुना। उनके प्रशिक्षक ने शोध की एक प्रतिलिपि, सेनेटर डेविड एल वॉल्श, जो इस विधेयक की सुनवाई समिति के एक सदस्य थे, को भेजे जाने पर जोर दिया। इस सेनेटर इस शोध से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें समिति के सामने हाजिर होने को कहा गया।

अल्बर्ट ने अपना पक्ष रखा और बताया कि कैसे ये छोटे से स्टेशन बनाए गए। वह खचाखच भरे समिति के कमरे में यह बताते हुए रो ही पड़े कि यदि यह विधेयक पास हो गया तो ये शौकिया रेडियो स्टेशन बंद हो जायेंगे क्योंकि वे लाइसेंस शुल्क और अन्य सभी आवश्यकताओं का खर्च नहीं उठा सकते। अमेरिकी कांग्रेस की Wireless Regulation विधेयक पर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते यह छोटा सा शौकिया स्टेशन HAM, देश के उन सभी छोटे शौकिया स्टेशनों के लिए संघर्ष का प्रतीक बन गया, जिन्हें बड़े वाणिज्यिक स्टेशन अपने लालच के चलते, खतरा मानते थे व अपने आसपास भी उनकी उपस्थिति नहीं चाहते थे।

अंत में यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के सभापटल पर आ ही गया, उस समय लगभग हर वक्ता की जुबान पर था “…. बेचारा नन्हा सा HAM” बस उसी दिन से शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को HAM कह कर पुकारा जाने लगा और शायद रेडियो समयकाल के अंत तक पुकारा जायेगा।

अगले आलेख में पढ़िए कि आखिर सोनिया गांधी, अमिताभ बच्चन जैसे शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) आख़िर करते क्या हैं!?

शौकिया रेडियो, HAM रेडियो क्या है!
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शौकिया रेडियो, HAM रेडियो क्या है!” पर 17 टिप्पणियाँ

  1. जानकारी से भरपूर इस आलेख के लिये आभार !!

    — शास्त्री जे सी फिलिप

    — बूंद बूंद से घट भरे. आज आपकी एक छोटी सी टिप्पणी, एक छोटा सा प्रोत्साहन, कल हिन्दीजगत को एक बडा सागर बना सकता है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!

  2. पाब्‍ला जी । बेहतरीन पोस्‍ट । ज्ञान जी के ब्‍लॉग पर आपकी टिप्‍पणी के बाद से ही सारी गतिविधियों को ट्रेस करते रहे हैं । इस टिप्‍पणी के ज़रिए हम आपको अपने सामूहिक ब्‍लॉग ‘रेडियोनामा’ के लिए आमंत्रित करते हैं । आपके जी-मेल आई डी पर औपचारिक तकनीकी निमंत्रण भेज दिया जायेगा,
    हम चाहते हैं कि आप हैम रेडियो पर आप रेडियोनामा पर पूरी श्रृंखला लिखें ।

    यूनुस ख़ान विविध भारती

  3. बहुत अच्छी और उपयुक्त जानकारी दी है आपने।….प्रस्तुति सुंदर है।

  4. निश्चय ही काफी उपयोगी जानकारी दी है आपने. संचार के इस नए साधन से आम लोग कैसे जुडें इसकी जानकारी भी दें.

  5. इस शानदार जानकारी के लिये आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। पहली बार किसी हिंदी ब्लॉग पर इतनी उम्दा जानकारी मिल सकी है। मेरा निवेदन है कि आप विविध भारती वाले यूनुस ख़ान का अनुरोध कबूल कर लें तब हम हैम के बारे में जो भी जानकारी बच रही है वो पूरी पढ़ पाएंगे। अगर मैं हैम रेडियो ऑपरेटर बनना चाहूं तो मुझे क्या करना होगा। क्या ये खर्चीला शौक है? कम्युनिटी रेडियों के बारे भी अगर आप ऐसी ही जानकारी दे सकें तो मेहरबानी होगी।

  6. चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
    लिखते रहिए लिखने वाले की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल,शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका भी देखें
    http://www.zindagilive08.blogspot.com

  7. वाह यूनुस ने आप को अच्छा पकड़ा रेडियोनामा के लिये।
    —–
    ब्लॉगस्पॉट ने शायद गूफ-अप किया। मैने सबसे पहले टिप्पणी की थी। वह अंतर्जाल में भटका गया!

  8. एक प्रयास को आपने सबने सराहा, धन्यवाद।
    … और ज्ञान जी, बेशक आपकी अभिभूत कर देने वाली टिप्पणी सबसे पहले आयी थी, लेकिन इस पोस्ट पर नहीं:-)
    वह तो अपनी जगह मौज़ूद है, भटकी नहीं है!

    यूनूस जी मेरी गतिविधियों को ट्रेस करते रहे, यह पढ़ कर तो डर ही गया:-) वैसे उनका आग्रह कैसे ठुकरा सकता था।

    Anonymous जी ने क्यों अनाम बन कर तारीफ की, समझ नहीं आया। अनामपन का चोला तो विरोधात्मक बातों को पहुँचाने के लिए पहने जाने का रिवाज बन गया है।

  9. बहुत ही बढ़िया जानकारी दी है आपने। ब्लॉग जगत में पुनः सक्रिय होने के लिए बहुत-बहुत बधाई और इतने अच्छे लेख के लिए साधुवाद।

  10. आज पूरी सिरीज़ दुबारा पाढ़ी , हैम रेडियो के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है ! आपके यह लेख बहुतों के काम आयेंगे !
    आभार आपका !
    टिप्पणीकर्ता सतीश सक्सेना ने हाल ही में लिखा है: हिमालय, को समझते,उम्र गुज़र जायेगी – सतीश सक्सेनाMy Profile

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